दिया तले अंधेरा, ढिबरी युग मे मेदिनीनगर का यह टोला

पलामू

मेदिनीनगर : नवजवान संघर्ष मोर्चा के महासचिव और प्रभारी अभिषेक और राकेश तिवारी ने रेड़मा के हरिजन टोला में लोगो से मुलाकात की, प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि जहाँ पूर्व मंत्री त्रिपाठी जी का घर हो और  तत्कालीन भाजपा सरकार की 2018 तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हो, वहां पूरा गांव अंधकार में है. ऐसे में जरा सोचिए पक्ष कहां है..? और विपक्ष् कहा है..? 

पंचायत से नगर निगम बन चुका है. करीब एक दशक गुजर गए और नगर निगम भी बन गया. लेकिन यहाँ पर न तो पानी है, न बिजली, न सड़क, न गैस कनेक्शन और न ही मकान है. ऐसे में आप जरा सोचिए एक तरफ पक्ष का कहना है, कि 2018 में घर-घर बिजली पहुंचेगी. सभी का घर रोशन होगा. तत्कालीन भाजपा सरकार का कहना है, कि अगर 2018 तक बिजली नहीं दे पाया तो वोट नहीं मांगूगा. आप जरा सोचिए इतने बड़े बड़े दावे और नगर निगम में भी अभी तक बिजली नही पहुच पाया. यह समझ में नहीं आ रहा की यहाँ आखिर हो क्या रहा है. अभी तक एक भी सुविधा इस हरिजन टोला में नहीं दिया गया है. अब आप समझिए एक दशक से यहां के लोग कैसे रहते होंगे ? सिर्फ और सिर्फ जीने के लिए, पहचान के लिए आधार कार्ड, वोटर कार्ड बना कर छोड़ दिया गया है, ताकि आराम से टेंपू में लोड करके इनका वोट का इस्तेमाल चुनाव जीतने में किया जाए. हद तो तब है जब यहां पर विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के नेता का घर हो उसके बावजूद भी पता नहीं विपक्ष की भूमिका क्या है. और अभी तक विकास कहाँ है, कुछ पता ही नहीं चलता. ज़रा आप सोचिए इन लोग कैसे किस हाल में जी रहे हैं. हम लोग आज भी किस दशक में है, यह समझ में नहीं आता जबकि पलामू में एक से एक धुरंधर नेता को विधायक से मंत्री से विधानसभा अध्यक्ष कुर्सी तक बैठाने का काम किया है. उसके बावजूद भी यहां पर कुछ भी नहीं है. यही है विधानसभा की सच्चाई. विधायक का पता नहीं, सांसद का पता नहीं, पक्ष का पता नहीं और विपक्ष का पता नहीं, बाकी निगम तो अभी बना ही है. एक दशक गुजर गए हैं, अब देखते हैं कब तक इनको मूलभूत सुविधा सरकार या विपक्ष दिलाती है.

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