बीमार पुलिस के जवान का भी सदर अस्पताल के बिगड़ैल कमिर्यों ने नहीं किया इलाज़, अंदरखाने का सच आया सामने

पलामू


मेदिनीनगरलाजे लाज से मर गया था, ढीठे ढीठई से जी गया था। शायद यही हाल है स्वास्थय महकमा का, जिनके ढीठई के कसमें खाऐंगे भ्रष्ट सिस्टम के कर्ताधर्ता और लोक लाज छोड़ नहीं सुधरने का संकल्प लेंगे सदर अस्पताल का उदाहरण देकर, ये कहना तब गलत नहीं होगा, जब सदर अस्पताल में गंभीर हालत में पुलिस जवान को लाया गया। जहां जवानों, पुलिसकर्मीयों को घंटे-दो घंटे इंतजार कर हो हंगामा करना पड़ा। तब जाकर इलाज प्रारंभ हुआ, और आइसीयू में एसी चलाई गई। वैसे तो बाकी मरीजों को आइसीयू में भी मरीजों के लिए पंखा अपनी ओर से लगाना पड़ता है। दरअसल प्रमंडलस्तरीय पुलिसकर्मीयों का प्रशिक्षण लेस्लीगंज स्थित जैप आठ कैंप में चल रहा है। उसी दौरान गढ़वा का जवान सुनील कुमार रजक मूर्छित हो गया। जिसे इलाज के लिए साढ़े दस बजे तक ही सदर अस्पताल ले आया गया, पर चिकित्सक के देखने एवं मुफ्त की दवा लिखे जाने के बाद भी मजाल है कि कर्मी अपने आदत से बाज आ जाएं। ना तो दवा ही दी, ना मरीज के पास झांकी मारने जाए। सूचना पर डीएसपी चंद्रशेखर आजाद, इंस्पेकटर तरूण कुमार, टीओपी प्रभारी मंतूष्ट महतो समेत पेंथर के जवान पहुंचे तब जाकर इलाज शुरू हुआ, जो बेहद ही शर्मनाक है। सरकारी कर्मीयों, खासकर हमारे रक्षक पुलिस के जवानों के साथ ये रवैया सदर अस्पताल में चिंतनीय। बेलगाम हो चुकी स्वास्थय व्यवस्था को कैसे सुधारा जाए। इसके प्रति सरकार में बैठे लोग, और पलामू जिला प्रशासन क्यों नहीं ठोस कदम उठाती है। सोच से परे है।

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