सामूहिक विवाह कार्यक्रम में झामुमो नेता शशिभूषण मेहता की पुत्री समेत 51 जोड़े बंधे शादी के बंधन में

पलामू

सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 51 कन्याओ के हाथ हुए पिले, नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन भी बने गवाह

अगले साल भी 51 बहने की शादी कराएंगे डॉ मेहता

पांकीअंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर गुरुवार को पांकी विधानसभा क्षेत्र की 51 कन्याओं का सामूहिक विवाह कराकर झामुमो के केन्द्रीय सचिव डॉ. शशिभूषण मेहता ने सामाजिक सरोकार की एक ऐसी लंबी लकीर खींचने का प्रयास किया है, जो दूसरों के लिए प्रेरणादायी साबित हो सकती है. सबसे अच्छी बात यह रही कि डॉ. मेहता ने अपनी पुत्री का विवाह भी इसी सामूहिक मंडप में सम्पन्न कराया और अमीरी-गरीबी के भेद को दर किनार कर दिया. साथ ही डॉ मेहता ने हर साल 51 जोड़ियों का सामूहिक आदर्श विवाह करने का घोषणा भी किया

पांकी के लालू मैदान में बजी शहनाई

गुरुवार दिन के दस बजते-बजते तक पांकी का लालू मैदान वेद मंत्रों और शहनाईयों की मंगल ध्वनियों में डूब गया. थोड़ी ही देर बाद 51 दूल्हों की बारात अपनी दुल्हन को लेने लालू मैदान पहुंचे, जहां दुल्हन सज-धजकर अपने जीवन साथी का इंतजार कर रही थी. इस वैवाहिक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिपक्ष के नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन मौजूद थे. श्री सोरेन ने इस अवसर पर नवदम्पतियों को शुभकामनाएं दी.

वैवाहिक कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के भी दो जोड़े का हुआ निकाह

पांकी विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों से आये इन जोड़ों ने एक-दूसरे को जयमाला पहनायी. इसके बाद पूरे रीति-रिवाज के साथ इनका विवाह सम्पन्न कराया गया. सभी जोड़ों के लिए अलग-अलग मंडप बनाये गये थे और सबके लिए एक अलग पंडित की व्यवस्था की गयी थी. इस वैवाहिक कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के भी दो जोड़े थे, जिन्हें निकाह पढ़ाया गया. कुरान की आयतों से इन दोनों युगल जोड़ों को जीवन भर साथ निभाने की कसमें खिलायी गयीं. कबूल और सात फेरों का यह समागम देश की गंगा-जमुनी संस्कृति की मिसाल थी, जो दहेज रहित एक नये समाज की सुंदर तस्वीर पेश कर रही थी. इस वैवाहिक आयोजन को रंगीन और खुशनूमा बनाने के लिए बाहर से आई गायिका देबी एवं जूनियर खेसारी ने विभिन्न रंगारंग कार्यक्रम भी पेश किया. इस दौरान छऊ, नागपुरिया जैसी राज्य की विभिन्न लोक कलाओं से भी लोगों को रू-ब-रू होने का मौका मिला.

सामूहिक विवाह परंपरा को सबने सराहा

यह एक ऐसा समारोह था, जिसमें सामूहिकता का भाव था. न कोई अमीर न कोई गरीब और न ही दिखावे की कोई होड़. इसलिए सुर्ख जोड़े में दुल्हनों के चेहरे खुशियों से दमक रहे थे. विवाह के लिए आयी कई कन्याओं से इस प्रतिनिधि ने बात की. सबने एक स्वर में कहा कि सामूहिक विवाह बेहतरीन परंपरा है. उन्होंने कहा कि सामाजिक तौर पर यह सुधार का कार्य है. अमीर हो या गरीब, सबकी यहां एक साथ शादी हो जाती है. इसमें किसी को यह एहसास नहीं होता कि वह गरीब है.

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