राज्य सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है : सत्येंद्र नाथ तिवारी

गढ़वा : गढ़वा-रंका विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक श्री सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि झारखंड की महागठबंधन की सरकार राज्य की जनता का विश्वास खो चुकी है।

राज्य सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है : सत्येंद्र नाथ तिवारी






गढ़वा : गढ़वा-रंका विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक श्री सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि झारखंड की महागठबंधन की सरकार राज्य की जनता का विश्वास खो चुकी है। ऐसी स्थिति राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रवासी मजदूरों के साथ छल और गंदी राजनीति करने के कारण उत्पन्न हुआ है। राज्य सरकार को आत्मचिंतन करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार अपने खुद के किए गए घोषणा एवं उसके अनुपालन की समीक्षा करे तो स्वत: ही जनता के विश्वास उठने का कारण स्पष्ट हो जाएगा।

श्री तिवारी ने जनता के विश्वास टूटने के कारणों को दर्शाते हुए कहा कि (1) प्रवासी मजदूरों के बारे में राज्य सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर झूठा साबित हुआ। (2) झारखंड कोरोना सहायता एप में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ₹2000 देने की घोषणा की गई, जो झूठा साबित हुआ। (3) प्रवासी मजदूरों को घर वापस लाने संबंधित वेबसाइट लांच कर गुमराह किया गया। (4) ट्रेन और बस से लाने की घोषणा की गई जो पूरी तरह फ्लॉप हो गया। पुनः नए शिगूफा के साथ राज्य सरकार मजदूरों के सामने हवाई जहाज देने की बात कह रही है। सभी घोषणाएं अखबार, प्रचार और कागजों तक सिमट कर रह गई। इन योजनाओं का लाभ लेने से अधिकांश लोग वंचित रहे।

पूर्व विधायक ने कहा कि अब झारखंड के प्रवासी मजदूर सरकार की बातों पर विश्वास ना करते हुए पैदल, साइकल, अपने माध्यम से गाड़ी की व्यवस्था कर हजारों किलोमीटर दूर से घर वापसी के लिए सड़कों पर हैं। सड़कों पर उनके लिए ना तो खाने-पीने की, ना वाहन की, ना ही चिकित्सीय सुविधा की चिंता राज्य सरकार द्वारा की गई। परिणाम स्वरूप कई मजदूर संक्रमित हुए। कईयों को जान गंवाना पड़ा। ऐसे में पूरी तरह विफल राज्य सरकार को सत्ता में रहने का क्या औचित्य है?

श्री तिवारी ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा है कि घर वापस आ रहे प्रवासी मजदूर जो कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। उन्हें अविलंब आर्थिक सहयोग करते हुए चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराकर सरकार जान बचाने का काम करे। साथ ही जिन मजदूरों की जान राज्य सरकार की विफलता के कारण चली गई, उनके आश्रित को सरकार कम से कम ₹10 लाख का मुआवजा दे।