ट्रेन का डब्बा वाला स्कूल

पलामू

पलामू में एक ऐसा गांव है जहाँ बच्चे सुबह उठकर बस्ता उठाते हैं और रेलगाड़ी के डिब्बों में जाकर बैठ जाते हैं। ये डिब्बे उनके लिए बेहद खास हैं, और उन्हीं डिब्बों में वे सुनहरा ख्वाब भी बुन रहे हैं। हालांकि आपको बता दें कि ये डब्बे उन्हें कहीं लेकर नहीं जाते, बल्कि यही उनका स्कूल है। अगर आप थोड़ा सा गौर करें तो समझ आएगा कि ये ट्रेन के डिब्बे नहीं, स्कूल के कमरे हैं…

सतबरवा के कसियाडीह पंचायत के सरकारी स्कूल में बच्चों को स्कूल तक बुलाने के लिए इस अनोखे तरीके से स्कूल को पेंट कराया गया है।
इस खास तरीके से पेंट करने के बाद स्कूल को देखकर एक बार तो आप भी हैरान रह जाएंगे। स्कूल आने वाले छात्र भी अपनी क्लासेज में जाने में अब पहले से ज्यादा खुश नजर आ रहे हैं।

सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, आसपास के लोगों के लिए भी यह स्कूल आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्कूल के कमरे के अंदर भी साइंस की पेंटिंग बनायी गयी है,  सबको इस तरह का यह अनूठा प्रयोग पसंद आ रहा है।

स्कूल की शिक्षिका भी कहती हैं कि इस नए प्रयोग से बच्चों की संख्या बढ़ गयी है, बच्चे इस स्कूल वाली इस ट्रेन में बेहद खुश रहते हैं…

स्कूल के प्रधानाध्यापक की मानें तो यात्रा के दौरान उन्होंने केरल में इस तरह का विद्यालय देखा था और तब से उनके मन मे भी अपने स्कूल को अनोखा बनाने की चाह थी, सरकार की ओर से विद्यालय को आदर्श स्कूल का दर्जा मिलने के बाद स्कूल को ट्रेन का रूप दे दिया गया….

 बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए यह प्रयोग बिल्कुल अनोखा है, पूरे जिले में इस विद्यालय की चर्चा जोरों पर है। आसपास के लोग विद्यालय को देखने पहुँच रहे हैं…बच्चों के बीच जहाँ उत्साह है वहीं शिक्षक भी पलामू में  शिक्षा की स्थिति सुधारने की दिशा में सराहनीय पहल मान रहे हैं। आशा है आपको भी ट्रेन के डब्बे वाले इस स्कूल को देख कर बेहद खुशी हुई होगी।

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