नक्सलियों के दस्तक से पुलिस की चुनौती बढ़ी

लातेहार

चंदवा : अति उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित लातेहार जिले के चंदवा में उग्रवादियों ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। 11 अक्टूबर को जरमा व 12 अक्टूबर को रूद (बरवाटोली) के हड़गड़ा जंगल में पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद यह बात स्पष्ट हो गई है कि उन्होंने अपनी जड़े जमानी शुरू कर दी है। सबसे बड़ी चिन्ता उनके पास एसएलआर, एके 56 जैसे आधुनिक हथियारों का मिलना है। 11 अक्टूबर को जरमा जंगल में चार घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद और पुलिस द्वारा तीन ओर से घेरने के प्रयास के बाद भी उग्रवादी निकल भागने में सफल रहे। वहीं 12 अक्टूबर को हडगड़वा (रूद) जंगल में एक बाइक पर सवार तीन उग्रवादी पुलिस को चकमा देने में सफल रहे। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने उग्रवादियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कारवाई के संकेत दिए हैं। लोगों को पुलिस के परिणाम का इंतजार है। गौरतलब हो कि 90 के दशक में चंदवा नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। माओवादी, झासंजमुमो, टीपीसी, पीएनएफआई और अन्य संगठनों में वर्चस्व की लड़ाई को लेकर कई बार खूनी संघर्ष हुआ था। पुलिसिया कार्रवाई और शुरू किए गए आत्मसमपर्ण नीति के बाद लगने लगा था कि उग्रवाद का सफाया हो गया लेकिन लगातार दो दिनों तक हुई मुठभेड़ के बाद जहां नक्सलियों के दस्तक को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। वहीं पुलिस के लिए यह चुनौती बन गई है।

उग्रवादियों को है भौगोलिक स्थिति की जानकारी : पुलिस के साथ उग्रवादियों की मुठभेड़ के बाद सुरक्षित बच निकलने के पीछे यह माना जाता है कि उन्हें क्षेत्र की भौगोलिक जानकारी है। जिसका लाभ वो बखूबी उठाते हैं।

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