श्री बंशीधर नगर : भारी मात्रा में जमीन में गड़ी मिली जीवन रक्षक एक्सपायरी दवाएं

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श्री बंशीधर नगर : अनुमंडलीय अस्पताल में बुधवार को भारी मात्रा में विभिन्न प्रकार की जीवन रक्षक एक्सपायरी दवाओं को जमीन में गाड़े जाने का मामला प्रकाश में आया है। जानकारी के अनुसार गाड़े गये एक्सपायरी दवाओं में वर्ष 2010 से लेकर 2013 तक की दवाएं शामिल हैं। इस बात का खुलासा गुरुवार को होने के बाद से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जानकारी के अनुसार ट्रामा सेंटर में संचालित अनुमंडलीय अस्पताल को पुराने भवन में शिफ्ट किया जाना है, उसी की आड़ में ट्रैक्टर से एक्सपायरी दवाओं की ढुलाई कर पुराने अस्पताल परिसर में ही जेसीबी मशीन से गड्ढा कर दवाओं को डाल मिट्टी से ढंक दिया गया है। मामला प्रकाश में आते ही अस्पताल प्रबंधन पसोपेश में है। जानकारी के अनुसार बगैर प्रक्रिया पूरा किये अस्पताल से भारी मात्रा में कबाड़ को भी बेच दिया गया है। कबाड़ी के यहां दवाएं मिलने के संदेह में पुलिस ने छापेमारी कर कबाड़ी समेत दो लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं दवा के रद्दीकरण में भी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मई 2011 में अनुमंडलीय अस्पताल में भारी मात्रा में एक्सपायरी दवा जब्त की गई थी। उसी दवा को वर्ष 2015 में तीन सदस्यीय रद्दीकरण समिति द्वारा रद्दीकरण किया गया था। जिसे बुधवार को गड्ढे में डालकर डिस्पोज किया गया है। जबकि उक्त गड्डे में एल्बेंडाजोल की जो जनवरी 2013 में एक्सपायरी थी, नाटी टी जैड जो फरवरी 2012 में एक्सपायरी डेट था और एंटी मलेरियल कॉम्बी ब्लिस्टर पैक जो अगस्त 2012 में एक्सपायरी हुआ है। वह भी मिली जो अस्पताल प्रबंधन के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। अनुमंडलीय अस्पताल में एक ओर जहां मरीजों को हर दवा नहीं मिल पाता है, वहीं रखे रखे भारी मात्रा में दवाओं का एक्सपायर हो जाना अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है।

क्या है रदीकरण प्रक्रिया : चिकित्सकीय जानकारों के अनुसार अस्पताल में दवाओं का एक्सपायर होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। एक्सपायर हुई दवाओं को प्रक्रिया पूरी करते हुए डिस्पोज किया जा सकता है। उसके लिए अस्पताल की तीन सदस्यीय रदीकरण समिति गठित की जाती है और समिति एक्सपायर हुई दवाओं को सूचीबद्ध कर उसे डिस्पोज करने का लिखित प्रस्ताव पारित करती है। उसके बाद दवा को डिस्पोज किया जाता है लेकिन यहां समिति द्वारा 2011 में एक्सपायर दवाओं को डिस्पोज किये जाने का प्रस्ताव पारित किया जाता है और उसी की आड़ में 2011 के बाद एक्सपायर हुई दवाओं को डिस्पोज कर अपने नाकामी पर पर्दा डालने का प्रयास किया गया है।

क्या कहते हैं जानकर: चिकित्सकीय जानकारों का कहना है कि अस्पताल में इतने ज्यादा मात्रा में दवाओं का एक्सपायर होना पूर्ण रूप से अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही है। क्योंकि भारी मात्रा दवाओं का एक्सपायर होने का प्रमुख कारण दवाओं का नियमित रूप से स्टॉक पंजी का संधारण नहीं होना है। यदि नियमित रूप से स्टॉक पंजी का संधारण होता तो एक्सपायर होने से पूर्व उन दवाओं को आवश्यकतानुसार दूसरे अस्पतालों में भी भेजा जा सकता था।

इसकी जानकारी मिलने पर मैंने डीएस से पूछा तो बताया गया कि 2015 में प्रक्रिया पूरा करने के बाद दवाओं को डिस्पोज किया गया है। यदि 2011 के बाद की एक्सपायरी दवाओं को भी डिस्पोज किया गया है तो इसकी जांच कर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

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