फिर गर्भवती हुई कस्तूरबा विद्यालय कि नाबालिग छात्रा

कांडी : बेटियों की पढ़ाई के लिए सरकार कई सारी योजनाएं चला रही है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ स्लोगन हर बार सुनने को मिलता है.

फिर गर्भवती हुई कस्तूरबा विद्यालय कि नाबालिग छात्रा






कांडी : बेटियों की पढ़ाई के लिए सरकार कई सारी योजनाएं चला रही है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ स्लोगन हर बार सुनने को मिलता है. बेटियों की सुरक्षा के लिए भी कोई सारे नियम कानून बनाए गए हैं. लड़कियों की शिक्षा की अगर बात की जाए तो पहले पायदान पर कस्तूरबा आवासीय विद्यालय है जहां बेटियों को रहने खाने और पढ़ने की व्यवस्था निशुल्क दी जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों की साक्षरता दर को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया. कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के कारनामे सुनकर आप हैरत में पड़ जाएंगे. जिन बच्चों के जीवन को शिक्षा के नींव से मजबूत कर उनके भविष्य को  सुनहरा बनाना है उन बच्चों की जिंदगी तबाह हो जा रही है. सही गलत का फर्क नहीं समझने वाले नाबालिक बच्चों को कस्तूरबा आवासीय विद्यालय तो भेज दिया जा रहा है लेकिन माता पिता और परिवार की निगरानी छूट जा रही है. जिसका नतीजा ऐसा आ रहा है जिसे जान शायद ही कोई मां बाप अपने बच्चों को खुद से अलग कर आवासीय विद्यालय भेज पाए  गढ़वा जिले में कस्तूरबा विद्यालय की सातवीं कक्षा की छात्रा के मां बनने का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था की कांडी कस्तूरबा आवासीय विद्यालय से एक ऐसी खबर आई जिसने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है. शिक्षा विभाग मे हड़कंप मचा हुआ है. एक बार फिर कस्तूरबा विद्यालय में पढ़ने वाली नाबालिग लड़की के गर्भवती होने का मामला सामने आया है. कस्तूरबा विद्यालय से लगातार इस तरह के मामले सामने आने से शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है जांच के आदेश दिए गए हैं.

यूं तो इन मामलों पर  कोई भी अधिकारी कुछ बोलने से कतराते है. पर फिर भी  पूरे मामले पर जब हमने करवा के जिला शिक्षा पदाधिकारी राम प्रसाद मंडल से बात करने की कोशिश की आखिर इस तरह के मामले क्यों सामने आ रहे हैं.

कस्तूरबा विद्यालय में लड़कियों का गर्भवती होना पिछले माह सातवीं कक्षा की छात्रा का मां बनने का खुलासा होना सारे सवाल खड़े करती है हालांकि इस सवाल का भी जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास जवाब था.

कस्तूरबा आवासीय विद्यालय से लगातार इस तरह के मामले सामने आने से अभिभावकों का विश्वास कम होना लाजमी है. संवेदनशीलता दिखाकर यदि ऐसे मामलों को रोका नहीं गया तो परिणाम बेहद बुरा होगा जांच कर मामले की लीपापोती करने के बजाए जरूरत है सख्त कार्रवाई  की.