मेदिनीनगर : शहीदों के सम्मान में मुख्तियार अली ने छेड़ी तान

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मेदिनीनगर : शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव की याद में आयोजित दो दिवसीय शहादत समारोह सांस्कृतिक संध्या के बीच संपन्न हो गया। जिला स्कूल के मैदान में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में शामिल हुए देश के मशहूर सूफी गायक मुख्तियार अली के गायन के उपस्थित दर्शक दीवाने हो गए। मुख्तियार अली ने अपने गायन की शुरुआत हरि ओम हरी मौला के नाद से की। इसके बाद कबीर व बुल्ले शाह के कलाम को लगातार प्रस्तुत करते रहे। इस दौरान उन्होंने झीनी झीनी बीनी चदरिया.., नित खैर मंगा.., झूले झूले लाल मस्त कलंदर.., ओ लाल मेरी पत रखियो बला.., ओ मेरा पिया घर आया ओ लाल नी.. सरीखे कई गीत पेश कर उपस्थित लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से आपसी प्रेम, भाईचारा व एकता का संदेश दिया। मुख्तियार अली की गायकी में मंच पर बतौर कोरस वकार युनूस साथ दे रहे थे। तबले पर उस्ताद गुलाम हुसैन, ढोलक पर राकेश कुमार, की-बोर्ड पर फखरुद्दीन व पैड पर विपिन कुमार उनके साथ संगत कर रहे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी गायकी से दर्शकों को सूफी मत से परिचय कराते हुए भाव विभोर कर दिया। मुख्तियार अली ने ऐसा शमा बांधा की कलाकार और दर्शकों का भेद भी मिट गया। 

शहीदों ले लो मेरा सलाम गीत से हुई कार्यक्रम की शुरुआत : समापन समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत पलामू इप्टा व मेदिनीनगर क्वायर के कलाकारों ने शहीदों ले लो मेरा सलाम गीत से की। इस गीत के बाद क्वायर की कलाकार निधि पांडेय ने भोजपुरी गीत के माध्यम से देश में बढ़े भ्रष्टाचार पर चिता करते हुए लोगों के बीच सवाल रखा देश कैसे बचेगा। इसके बाद भागलपुर इप्टा के ताल डांस ग्रुप के कलाकारों ने जट जटिन की नोकझोंक पर आधारित लोक गीत के साथ नृत्य प्रस्तुत किया। इसके साथ ही बिहार की सांस्कृतिक व साझी विरासत संबंधित झिझिया नृत्य, मल्हा नृत्य, गोदना नृत्य सहित अन्य नृत्य की प्रस्तुति की। प्रस्तुत नृत्यों को भागलपुर इप्टा की सचिव श्वेता भारती के निर्देशन में तैयार किया गया था। ग्रुप के कलाकारों में जूली, राहुल कुमार, प्राची कुमारी, खुशी कुमारी, गौरव, प्रवीण व निशा शामिल थे। नृत्य कार्यक्रम का संचालन भागलपुर इप्टा के साहिल कर रहे थे।

मल्लाह समाज की आजीविका खतरे में है : साहिल

भागलपुर इप्टा के साहिल ने नाविक समाज की चर्चा करते हुए कहा के बिहार गंगा के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित है। यहां बहुत पहले ट्रांसपोर्टिंग का साधन जलमार्ग था। इससे मल्लाह समुदाय के लोगों की आजीविका चलती थी। आज उनकी आजीविका खतरे में है। मल्लाह समुदाय के बीच उत्सव के दौरान जो नाच गान होते थे उन्हें मल्हा नृत्य के नाम से जाना जाता है। आज यह कला भी खतरे में है। जिसका संरक्षण जरूरी है। इसी प्रकार किसानों के संघर्ष की भी उन्होंने चर्चा की। शहादत समारोह के मौके पर दो दिनों तक चलने वाले सांस्कृतिक आयोजनों का संचालन रविशंकर ने किया। समारोह के अंत में शहादत समारोह समिति की पूरी टीम ने हम होंगे कामयाब गीत प्रस्तुत किया। समिति के अध्यक्ष डॉ. अरुण शुक्ला ने अतिथि कलाकारों व स्थानीय कलाकारों के साथ दर्शकों व पलामू के पत्रकारों को धन्यवाद प्रेषित किया।

अतिथियों को मिला सम्मान :  कार्यक्रम के अंत में सवेरा नाटक कला विकास मंच की ओर से अतिथि कलाकारों को सम्मानित किया गया। सवेरा नाट्य कला मंच के नाट्य निर्देशक अब्दुल हमीद व जावेद सहित टुकटुक घोष, रिकी सिंह, आसना भंगरा, तनवीर आदि ने अतिथि कलाकारों को शॉल प्रदान कर सम्मानित किया। इसके साथ समिति की ओर से कराटे के कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

कौन-कौन थे उपस्थित : कार्यक्रम का नेतृत्व शहादत समारोह समिति के डॉ. अरुण शुक्ला, उपेंद्र कुमार मिश्रा, शैलेंद्र कुमार, पंकज श्रीवास्तव, सुरेश सिंह, शैलेंद्र अग्रवाल, प्रेम प्रकाश भसीन आदि कर रहे थे। मौके पर शहादत समारोह समिति के विनीत कुमार, रवि शंकर, राजीव रंजन, राजन सिन्हा, मुकेश कुमार, प्रभात अग्रवाल, अरविद गुप्ता, शशि पांडेय, अजीत कुमार, ललन कुमार, समरेश सिंह, दिनेश कुमार शर्मा, नुदरत नवाज अब्दुल हमीद, शीला श्रीवास्तव, वंदना श्रीवास्तव आदि सक्रिय थे।

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