4th ग्रेड धांधली मामले में हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी , जायज क्यों न मानी जाये प्रशासन की कारवाई

पलामू


अभी-अभी पलामू के लिए सबसे बड़ी खबर आई है… कि झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू का हाईप्रोफाइल फ्रोर्थ ग्रेड जालसाजी मामले में उपायुक्त अमित कुमार की बड़ी कारवाई को जायज ठहराया है। चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी नियुक्ति मामले में हुए धांधली के खिलाफ युवा पलामू द्वारा छेड़े गए आंदोलन के बाद मुन्ना भाइयों को फंसाने के लिए रचे गए चक्रव्यूह को हाईकोर्ट की 17 वीं बेंच ने सही कारवाई के तौर पर माना। बचाव पक्ष की ओर से विज्ञापन के आधार पर दूसरी परीक्षा यानि प्रशासन की कॉउंसलिंग को गलत बताने को जस्टिस डॉ एस एन पाठक की अदालत ने सीरे से खारिज कर दिया, सभी बिंदूओं पर हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को नहीं मानते हुए स्पष्ट कर दिया कि ये अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है कि उच्च अधिकारी शिकायत होने पर जांच कर सकता है… और वैसे भी जगजाहिर है कि कॉउंसलिंग के बाद खुलासे ही नहीं हुए बल्कि प्रशासन ने दूध का दूध पानी का पानी कर दिया… विश्वसनीयता के साथ खिलवाड़ करने वाले मुन्ना भाईयों के साथ सभी चेहरों को उजागर करने में तकरीबन पलामू जिला प्रशासन कामयाब हुई है…।

लेकिन एक बिंदू है जिसपर पलामू की संवेदना जुड़ी है… जालसाजी में फंसे दर्जनों परिक्षार्थीयों का जेल में कैद होना मायूस करता है… हालांकि पलामू पुलिस प्रशासन ने पहले ही इसे दोषवार की श्रेणी कैद को कानूनन बतला दिया है… मगर उम्मीद पर दुनिया कायम है… हर उम्मीद से जुड़ी बातों के लिए गर्मी छुट्टी के बाद यानि चार हफ्तों का समय बचाव पक्ष के अनुरोध पर कोर्ट ने दिया है… बहरहाल केस खारिज होने से पहले चार हफ्ते का समय काफी है… लेकिन हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद व्यवहारिक रूप से सही माने जाने वाले पलामू जिला प्रशासन के जोखिम भरे उठाए गए कड़े कदम को कानूनन मजबूती भी मिली है।

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