पलामू : दिया तले अंधेरा, अंधेरे में कट रही जिंदगी, पता नही कब होगा सवेरा ??

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पलामू : देश में एक ओर बुलेन ट्रेन की आधारशिला पड़ चुकी है तो दूसरी ओर यह भी हैरानी भरी बात है कि स्‍वतंत्रता के 72 वर्ष बाद भी हमारे शहर मेदिनीनगर के रेड़मा में 1 ऐसा ऐसा टोला है जहाँ आज तक बिजली पहुँची ही नही. 

क्या रेड़मा का यह टोला वाकई भारत के विकास के सफर का हमसफर हैं?

यकीन करना मुश्किल होता है कि 21वीं शताब्दी के दौर में आज भी करीब 200 लोग लोग 18वीं शताब्‍दी में गुजारा कर रहे हैं. करीब 30 से 40 घरों में मोमबत्तियां जल रही हैं, ढिबरी जल रही है, लालटेन जल रही है. उन करोड़ों गरीब परिवारों में आज भी शाम के बाद बच्‍चों को पढ़ने में दिक्‍कत होती है. पढ़ते भी हैं तो लालटेन की रोशनी में. महिलाएँ खाना अंधेरे में बनाती हैं या फिर लालटेन की रोशनी में। अधिकतर महिलाओं पर दिन ढलने से पहले ही रसोई का काम खत्‍म करने का दबाव रहता है. 

क्या यूँ ही बनेगा नया इंडिया?

और आपको बेहद हैरानी कि बात तो ये है कि ये टोला ग्रामीण इलाके का नही बल्कि नवसृजित मेदिनीनगर नगर निगम का है. और उससे भी बड़ी हैरानी की बात ये है कि सौभाग्य योजना के तहत सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है. बावजूद रेड़मा चौक से महज 2 से किमी की दूरी पर ये हाल कहीं न कहीं जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता को दर्शाता है. ऐसा नही है कि रेड़मा के इस छेचानी टोला के ग्रामीण कभी शिकायत नही किये. बिजली  विभाग के तमाम पदाधिकारी के पास दरख़्वास्त लगाया. किसी ने कहा जीएम साहब से मिलो, ग्रामीण वहाँ भी पहुँचे 1 बार नही 2 बार जीएम साहब ने आशवस्त भी किया.

बावजूद ढिबरी युग से उन्हें राहत नही मिली, किसी से सुना कि सीएम जनसंवाद में शिकायत करो तुरन्त काम हो जायेगा, वो भी कर लिया पर कुछ होता नही दिखा. अंत मे ग्रामीणों ने अपने पूर्व पंचायत प्रतिनिधि अभिषेक तिवारी औऱ नौसमो के राकेश तिवारी से मिलकर अपनी पीडा बतायी.राकेश तिवारी के नेतृत्व में ग्रामीण पलामू उपायुक्त से मिलने पहुँचे. उनसे गुहार लगायी, सब दरवाजे पर दस्तक की कहानी सुनायी, और निवेदन किया कि उनके टोले में भी बिजली की व्यवस्था कर दी जाये, ताकि वो भी बल्ब की रोशनी में अपने बच्चों को पढ़ता देख सकें, उन्हें ढिबरी युग से निजात मिल सके. पलामू के युवा उपायुक्त डॉ शांतनु अग्रहरी ने  ग्रामीणों को आश्वश्त किया कि अगले 2 सप्ताह में रेड़मा का छेचानी टोला जगमग हो जायेगा. वर्षों की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा, अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या वाकई 2 सप्ताह में उपायुक्त महोदय इनका रहनुमा बन इनके सपने को साकार कर देंगे.

बेसब्री से इंतजार रहेगा, छेचानी टोला के उन ग्रामीणों को भी और हमें भी.

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