आचरण ही व्यक्ति को बनाता है राम या रावण : रत्नेश जी महाराज

गढ़वा

विश्रामपुर  : नवरात्र पर रेहला के डंडिला खुर्द में चल रही रामकथा के पांचवे दिन भगवान की बाल लीला का चरित्र चित्रण किया गया। अयोध्या धाम से पधारे कथावाचक रामानुजाचार्य रत्नेशजी महाराज ने कहा कि रावण कहीं बाहर से नहीं आता जाता। आचरण ही व्यक्ति को राम या रावण बनाता है। अच्छे आचरण के कारण भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हो गए। वहीं खराब आचरण के कारण रावण का सर्वनाश हो गया। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण में सुधार लाना  चाहिए। कहा कि ज्ञान व भक्ति मिलकर ही भगवान को प्रकट करा सकते हैं। कहा कि अज्ञानता को मिटाने के लिए हर हाल में ज्ञान का दीपक जलाना ही होगा। रत्नेशजी महाराज ने राम के बाल लीलाओं का जीवंत चित्रण कर लोगों को भक्ति सागर में तैरने पर मजबूर कर दिया। प्रवचन के दौरान भगवान राम के बाल लीलाओं की आकर्षक झांकी भी निकाली गई। 

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3 thoughts on “आचरण ही व्यक्ति को बनाता है राम या रावण : रत्नेश जी महाराज

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