बंशीधर : कैपिटल पड़ताल – जच्चा-बच्चा की मौत पर दोषी कौन..?

गढ़वा ‎बड़ी ख़बर ब्रेकिंग न्यूज़

छलिया के नगर में झूठ का बोलबाला,
डॉक्टर हुए बदनाम हकीम बना निवाला,
हम हैं निष्पक्ष न्याय मांगते खबर का,
कैपिटल बता रहा दोष है मानिसकता.

बंशीधर : ये खबर की बात है, कृष्ण की नगरी पलामू प्रमंडल के सीमावर्ती गढ़वा के श्री वंशीधर नगर से आई, जहां नवसृजित प्रखंड बरडीहा के उपस्वास्थय केंद्र में जच्चा-बच्चा की मौत ने सनसनी मचा दी. एएन एम से लेकर अनुमंडलीय अस्पताल दोषी हो गया, मगर दोष किसका हुआ ना तो ये समझने की कोशिश ही की गई ना ही किसी ने समझाने का जहमत ही उठाया. बस दोषारोपण कर अपने कर्तव्यों का इतिश्री कर लिया गया. पर स्वतंत्र, निर्भिक, निष्पक्ष खबर को न्याय देने वाला एकमात्र विश्वसनीय चैनल कैपिटल न्यूज ने पड़ताल किया तो समझ में आया कि वो हृदयविदारक घटना की जद में वो मानसिकता है जो पिछड़ेपन का प्रमाण है. जो बता रहा है कि अभी भी जानकारी का अभाव ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है.

दरअसल कैपिटल न्यूज ने पड़ताल की तो मृतक जच्चा तैमुन बीबी की चार बेटीयां पहले से हैं. लोगों ने भले ही कैमरे पर बोलने से मना किया पर चर्चा का बाजार गर्म है  कि बेटा पैदा करने का मृतक महिला पर गहरा दबाव था. शारिरिक रूप से कमजोर तैमुन के परिजनों को डिलेवरी के लिए बाहर ले जाने की सलाह भी दी गई थी, मगर वो खर्च के डर से या फिर अन्य वजह से मानसिकता का शिकार होकर स्थानीय स्तर पर प्रसव के लिए अड़े रहे. कहते हैं ना वही होता है जो मंजुरे खुदा होता है, उपर वाले के सामने किसी की नहीं चलती. बरडीहा के सरहसताल निवासी हकीम अंसारी के परिवार को बेटे की चाहत ने पहले ही चार बेटी दे दी. अब पांचवे में भी बेटी ही पैदा ले ली, उसे भी दुनिया भर के ताने ना झेलना पड़े उससे पहले ही उपर वाले ने उसे अपने पास ही बुला लिया. तैमुन को मृत बेटी पैदा ली, जिसके बाद तैमुन ने अपना आपा खो दिया. प्रसव के बाद बेटी और वो भी मृत जान जच्चा विचलित हो गई. छटपटाहट और तड़प की वजह से उसका रक्तस्त्राव होने लगा. जिसे रोकने के लिए उसे इंजेक्शन लगाना पड़ा. लेकिन अधिक ब्लीडींग होने की वजह से उसकी हालत खराब होने लगी. सहिया की सक्रियता ने ममता वाहन बुला रखा था. जिससे उसे तत्काल बेहतर इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल नगर भेजा गया. जहां डॉक्टरों ने देखा और हालात की गंभीरता देख गढ़वा ले जाने की सलाह दी गई. मगर वो इलाज के लिए वहां तक नहीं पहुंच पाई… बीच रास्ते में ही दम तोड़ दी.

भले ही खबर लापरवाही की आई मगर कैपिटल पड़ताल में मृतक के पति हकीम अंसारी ने स्वास्थय कर्मीयों को निर्दोष बताते हुए पैसे की मांग को भी निराधार बताया. हां गढ़वा से सरहसताल तक शव पहुंचाने की एवज में पैसे लिए जाने की बात बताई. जिसकी बात की पुष्टी ममता वाहन के चालक ने भी किया, उसने स्वीकार किया कि रात के अंधेरे में स्वास्थय सुविधा के बजाय शव पहुंचाने के एवज में तेल का दाम लिया गया है.

हालांकि सच को आंच नहीं होती, अब आप समझ गये होंगे कि हर मौत के पीछे स्वास्थय विभाग या सरकार ही दोषी नहीं होती. मगर सच दिखाने के लिए भी बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं. अखबारों में छपने वाले अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ राहुल का ये बयान व्यथित करता है कि जाकर गढ़वा सीएस से पुछिए. हर बात के लिए जिले के कर्ता धर्ता से पुछे तो फिर दो उपाधीक्षक का पद सिर्फ पल्ला झाड़कर नाम लुटने के लिए है. दरअसल डॉ राहुल जैसे जवाबदेह पद पर बैठे कर्ताधर्ताओं को ये समझना चाहिए कि पुछने के लिए तो हम उपायुक्त से लेकर स्वास्थय मंत्री तक से पूछ लेंगे. फिर आप भी अपना बोरिया बिस्तर समेट कर निकल जाइए. हम भी मान लेंगे कि यहां कोई है ही नहीं, दरअसल मामले को पेचीदा बनाना आसान है पर सच तभी सामने आएगा जब सच बोलने के लिए कोई सामने आएगा. खैर प्रसव की गंभीरता और बेटे की चाहत ने जच्चा और बच्चा दोनों को निगल लिया. जवाबदेही से बचने के बजाय जिम्मेवारी लेने की जरूरत है ताकि लोगों को जागरूक किया जाए. समय के अनुरूप सरकारी व्यवस्था का लाभ उठाया जाए.

वंशीधर नगर से सहयोगी श्रवण पासवान के साथ ए. पी. लकी की रिपोर्ट.

(कैपिटल न्यूज़ पलामू को लाइव देखने और एप डाउनलोड करने के लिये यहां क्लिक करें)

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