बोगीबील : 120 साल तक चलेगा बोगीबील पुल, पीएम ने देश को किया समर्पित

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बोगीबील : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी असम के डिब्रूगढ़ के समीप बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने डबल डेकर रेल और रोड पुल का उद्घाटन किया. इसकी लागत तकरीबन 5900 करोड़ है. असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच बने इस पुल के बनने से देश की सीमा और अधिक सुरक्षित होगी.

इस पुल का रणनीतिक महत्व भी है. अब भारतीय सेना अपने लाव-लश्कर के साथ अरुणाचल से सटे चीन सीमा तक कम समय में पहुंच सकती है. चीन की दखलअंदाजी को देखते हुए भारत ने भी अपनी सीमा को सुरक्षित करने को कमर कस चुकी है. बोगीबील पुल उसका ताजा उदाहरण है.

यह पुल 4.94 किलोमीटर लंबा है जो डिब्रूगढ़ जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण तट को अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती धेमाजी जिले में सिलापथार को जोड़ेगा. इस पुल से असम में डिब्रूगढ़ और अरूणाचल प्रदेश में पासीघाट के बीच आवाजाही आसान होगी. दिल्ली से डिब्रूगढ जाने वाली ट्रेन का समय भी तीन घंटे बचेगा. फिलहाल 37 घंटे लगते हैं इस मार्ग से 34 घंटे ही लगेंगे. आपको बता दें कि नई दिल्ली से दोपहर में डिब्रूगढ़ पहुंचने के बाद मोदी ने एक हेलिकॉप्टर से सीधे बोगीबील के लिए उड़ान भरी और नदी के दक्षिणी किनारे से 4.94 किलोमीटर लंबे डबल-डेकर पुल का उद्घाटन किया.

लोगों का अभिवादन करने के बाद मोदी कार से उतरे और असम के राज्यपाल जगदीश मुखी और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के साथ पुल पर कुछ मीटर तक चले.

प्रधानमंत्री ने ब्रहमपुत्र के उत्तरी किनारे पर अपने काफिले के साथ पुल को पार किया जहां वह तिनसुकिया-नाहरलागुन इंटरसिटी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाया.

यह ट्रेन एक सप्ताह में पांच दिन चलेगी. इस पुल से असम में तिनसुकिया और अरूणाचल प्रदेश के नाहरलागुन के बीच ट्रेन की यात्रा का समय 10 घंटे से अधिक तक कम हो जायेगा.

विशाल ब्रह्मपुत्र नदी पर बना, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण यह पुल अरूणाचल प्रदेश के कई जिलों के लिए कई तरह से मददगार होगा. 

डिब्रूगढ़ से शुरू होकर इस पुल का समापन असम के धेमाजी जिले में होता है. यह पुल अरुणाचल प्रदेश के भागों को सड़क के साथ-साथ रेलवे से जोड़ेगा.

असम समझौते का हिस्सा रहे बोगीबील पुल को 1997-98 में मंजूरी दी गई थी. ऐसा माना जा रहा है कि यह पुल अरूणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास रक्षा गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा.

इस परियोजना की आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा ने 22 जनवरी,1997 को रखी थी जबकि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में 21 अप्रैल,2002 को इसका काम शुरू हुआ था. कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने 2007 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था.

इसके क्रियान्वयन में देरी के कारण इस परियोजना की लागत 85 प्रतिशत तक बढ़ गई. इसकी अनुमानित लागत 3,230.02 करोड़ रुपये थी जो बढ़कर 5,960 करोड़ रुपये हो गई.

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