अंधविश्वास में दरिंदा बने ग्रामीण , तड़पा तड़पा कर मार डाला

पलामू

ये है वो अभागा बेटा, जिसके सामने ओझा-गुणी के चक्कर में अंधे हो चुके इंसानियत के दुश्मनों ने उसके बुजुर्ग मां-बाप को घर से उठा कर ले गये, जिसके बाद वो उनसे मिल ना पाया। मिला तो पुलिसिया तलाश में मृत शव। जिस उम्र में उन्हें सेवा पाना था, उससे पहले ही हत्यारों ने उससे उनके बुढ़े मां बाप को छीन लिया। और छिन लिया वो संसार जो सालों की मेहनत के बाद दोनों ने बसाया था। डायन-भूत के अंधविश्वास में पागल होकर उसके ही गांव के लोग उसकी मां के जान के दुश्मन हो गए और आखिरकार खून से ही अपनी प्यास बुझाई, पर उसके सर से छिन लिया, उसके माता पिता का साया। जिसका सहारा इसे बनना था।

दरअसल मनातू के इटवाही जंगल में दिल दहला देने वाला दृश्य था, जहां लाठी, डंडे, पत्थर से निर्दयता पूर्वक एक दंपत्ति का शव फेंका हुआ था। गांव से दस किलोमीटर दूर ये शव एक दिन पहले ही मारकर फेंका गया था, ये शिव उरांव के माता सुकनी देवी और पिता इंद्रदेव उरांव का है। ओझा गुणी का काम करने वाले मृतक इंद्रदेव का उसका समाज ही दुश्मन हो गया था जब आरोपी कैलाश उरांव की पूतोही पर कोई प्रेत के साया आने का वहम था, वो बार-बार ओझा इंद्रदेव को मारने को बोलती और जमकर दरसती थी। घटना के बाद उस एक वहम की शिकार महिला को बचाने के लिए गांव में ही पंचायत बैठाई गई और फिर उसे जान से मार देने का निर्णय लिया गया। मनातू के बीहड़ में आदिवासी समाज में फैले अंधविश्वास का ये नमूना है जहां आज के युग में भी लोग हत्यारा बनने से बाज नहीं आ रहे हैं।

गनीमत इतना रहा कि शिव अपना जान बचाकर भागने में सफल रहा, वरना अंधविश्वास में चूर अपने ही सगे उसे भी मारकर जंगल में फेंक आते। पर वो गांव से भाग रात भर छुपा रहा, और फिर सुबह जाकर थाने में लिखित आवेदन देकर घटना की जानकारी दी।

घटना की जानकारी मिलते ही आनन फानन में मनातू पुलिस बहेराटांड़ स्थित सुरगूजा टोला पहुंच तीन आरोपीयों को गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद हत्या कर फेंके गए शव को पुलिस तलाश कर पाई।

इंद्रदेव के ओझाई की बली वो खुद तो चढ़ा ही, उसकी पत्नी सुकनी भी इसका शिकार हो गई। मगर क्या इंद्रदेव की मौत के बाद वहम का ये खुला खेल खत्म हो जाएगा? शायद प्रशासन जगे और जागरूकता लाए तो, कुछ और बात होगी। लेकिन दंपत्ति की हत्या से पहले ही ऐसी घटनाओं पर रोकथाम लगे इस दिशा में कदम बढ़ाना जरूरी है। घटना एक सीख है। दो की जान गयी, परिवार उजड़ गया, हत्यारों को जेल में कैद भरी नरक की जिंदगी जीनी होगी। वैसे डायन बिसाही पर तो प्रशासन से लेकर कई संस्थाएं भी काम कर रही हैं, लाखों रूपये मिलते हैं, सब सो जाते हैं, जागना होगा, जगाना होगा।

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