लाइफ लाइन ‘कोयल नदी’ तट पर आखिर कब रुकेगी कचरा डंपिंग?

पलामू ‎बड़ी ख़बर

पलामू : पिछले दिनों ही कार्तिक पूर्णिमा महोत्सव के दौरान कोयल नदी तट पर नदियों को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया गया. गंगा आरती करते हुए कोयल नदी को बचाने के लिए दीये जलाये गये, लेकिन यह सिर्फ कार्यक्रम तक ही सीमित रह गया. शहर के कारोबारियों ने इस कार्यक्रम के अगले ही दिन से रात के अंधेरे में शाहपुर कोयल नदी तट पर कचरा डंप किया.

बता दें कि निगम क्षेत्र में इस तरह से कचरा गिराने पर आर्थिक दंड का प्रावधान है. लेकिन, इस क्षेत्र में गिर रहे कचरे पर अभी तक किसी तरह का दंड लगाने में निगम प्रशासन सफल नहीं हो सका है.

सड़े हुए आलू फेंके गये

कार्तिक पूर्णिमा के अगले दिन बाजार क्षेत्र में आलू के कारोबार करने वाले कथित सभ्य लोगों ने बोरे में भरकर भारी मात्रा में सड़े हुए आलू यहां फेंके. समाजसेवियों का तमगा लगाये लोगों ने अपने होटलों का जूठा कचरा यहां डंप किया. अब दिनभर यहां आवारा पशुओं का जमावड़ा लग रहा है और उससे उठती दुर्गंध ने राहगीरों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है. यह मामला यहां तक ही खत्म नहीं हुआ. खैनी के बड़े व्यवसायियों ने भी अपने प्रतिष्ठान से निकलने वाले कचरे को यहां फेंकने से गुरेज नहीं की. खैनी के डंठल फेंके गये.

तीन साल यहां डंप हो रहा कचरा

शाहपुर कोयल नदी तट पर पिछले तीन सालों से कचरा डंप किया जा रहा है. शुरूआत में जमीन नहीं रहने के कारण मेदिनीनगर नगर निगम (उस समय नगर पर्षद) द्वारा यहां कचरा गिराये गये. लंबे समय तक यहां कचरा डंप किये जाने के बाद जमीन मिलने पर निगम द्वारा यहां कचरा डंप किया जाना तो बंद कर दिया गया है, लेकिन आम व खास लोगों की आदतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

नहीं रहता  जिम्‍मेदार लोगों का ध्यान

नगर निगम बनने के बाद यहां की सफाई पर ना तो क्षेत्र के वार्ड पार्षद का और नहीं नगर निगम के मेयर-डिप्टी मेयर व कार्यपालक पदाधिकारी का ही ध्यान है. कभी-कभी पर्व त्योहारों पर जेसीबी लगाकर पहले से गिराये गये कचरे को कोयल नदी में डाल दिया जाता है. कचरे नदी में गिर जाते हैं और ऊपरी सतह साफ-सुथरी हो जाती है. फिर पूर्व की तरह कचरे गिराने का सिलसिला शुरू हो जाता है.

सफाई कर पार्क बनाने की घोषणा हवा हवाई

मेदिनीनगर के नगर निगम बनने के बाद कार्यपालक पदाधिकारी अजय साव ने इस क्षेत्र की सफाई कर यहां पार्क बनाने की बात कही थी, लेकिन यह भी हवाहवाई की साबित हुई. यहां ना तो पार्क बना और ना ही कचरा गिराना बंद हुआ. यहां कहना गलत नहीं होगा कि केवल मौखिक घोषणा करने से कुछ नहीं होता, उसे जमीनी हकीकत दिया जाये तो बेहतर होगा.

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