यहां लोग नहीं करते दुर्गा की अराधना, करते हैं असुर की पूजा, शोक में रहते हैं पूरे 10 दिन

लातेहार

लातेहार : जिले के अगरिया असुर टोला एक ऐसा इलाका है जहां दशहरा उत्सव में लोग शोक मनाते हैं. ये असुर वशंज के लोग हैं और इनका मानना है कि इस दिन हमारे असुर राजा की मौत हुई थी इस लिए हम खुशी नहीं मनाते. पूरा गांव शोक में रहता है.

दशहरा और दुर्गा पूजा हर्ष और उमंग का त्योहार है, क्योंकि इस दिन असत्य पर सत्य की जीत हुई थी. पर आइए हम आपको एक झारखंड के ऐसे गांव में लिए चलते हैं जहां लोग दुर्गा पूजा नहीं मनाते और पूरे 10 दिन शोक में रहते हैं.

नहीं मनाते दुर्गा पूजा 

दुर्गा पूजा को लेकर अगेरिया असुर समाज की बस्ती में कोई उत्साह नहीं होता. गांव के लोग मानते हैं कि यह दिन उनके समाज के प्रतापी राजाओं की मौत का दिन है. वे आज भी अपने आप को पुराने असुर समाज के ही वंशज मानते आ रहे हैं. चुंकि इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वद्ध किया था. वहीं भगवान राम ने असूर समाज का नाश किया था, इसलिए यह दिन इनके लिए शोक का दिन होता है. 

शहादत मनाते हैं

दरअसल अगेरिया असुर समुदाय के लोग दशहरा के पांच दिन के बाद शहादत मनाते हैं. इस दिन समाज के सभी लोग एक साथ जमा होकर अपने देवता की पूजा करते हैं और परंपरा के अनुसार उन्हें मुर्गा या बकरे की बली चढ़ाते हैं. हालांकि अब समाज के बच्चे पढ़ने लगे हैं तो पुरानी परंपरा भी धीरे-धीरे मंद पड़ने लगी है.

अधिकांश लोग जागरूक नहीं

दुर्गा पूजा को शोक के रूप में मनाने के बाद भी इस समाज का लगाव हिंदु समुदाय से जुड़ा है. चुंकि इस समुदाय की जनसंख्या काफी कम है. वहीं अब सरकारी योजनाओं के कारण बच्चे शिक्षा भी लेने लगे हैं तो वो धीरे-धीरे जागरूक हो रहे, लेकिन अभी भी समाज के अधिकांश लोग जागरूक नहीं हैं.

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