एक कदम मानवता की ओर

पलामू

युवाओं ने अपनाया समानता का गणतंत्र

दोना-पत्तल बनाने वालों को दिया कंबल, कपड़े

पलामू : एक कदम मानवता की ओर बढ़ चला, वो भी समानता को प्रदर्शित करते गणतंत्र दिवस के दिन। पलामू जिला मुख्यालय स्थित डालटनगंज स्टेशन पर मुख्य बाजार के युवाओं ने गणतंत्र दिवस यानी राष्ट्रीय पर्व मनाने के लिए गरीबों के बीच पहुंच भले ही अपने द्वारा, पर उनका होकर, उनके लिए कुछ करते दिखे। वहाँ पहुंच ठंड में कंबल, गर्म कपड़े और भोजन बांट लोकतंत्र को स्थापित भी किया और उनका हाल देख कुछ अलग करने का निर्णय भी लिया। बरवाडीह से चलकर सखुआ के चार पत्तियों को जोड़कर बीस पैसे की दर से बेचने वाली गरीब महिलाओं को खुले आसमान से गिरते शीत से बचने के लिए कंबल एवं उनकी बच्चों को एक जैकेट उपलब्ध करा कर अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को नया आयाम दिया।

कदम जब बढ़े मानवता की ओर तो मानवीय संवेदना की टीस भी उभर कर सामने आ गई। स्कूली ड्रेस में बच्चे अपने माँ के साथ कड़ाके की ठंड में दो-चार पैसे के लिए दोना बनाते नजर आए तो नवीन गुप्ता उर्फ लाल बाबू को इनके लिए कुछ और कर गुजरने का जज्बात हिलोरे मारने लगा। लाल बाबू की माने तो इन्हें एक कंबल की नहीं सही राह दिखाने की जरुरत है। इन्हें शिक्षीत कर लायक बनाने की जरूरत है, वरना गरीबी से मुक्ति नहीं दिलाई जा सकती है।

मनीष राज, हो, या गौरव, वसीम, करन, सोनल मोदनवाला या फिर अनुप गुप्ता… हर किसी के दिल में एक बात तो बैठ गई कि कंबल और कपड़े तो देना ही है, पर इसके साथ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचने वाले सरकारी लाभ और उसे उपयोगी बनाने पर भी जोर देना होगा… वरना हर साल सेवा के नाम पर कंबल बांटना कारगर नहीं होगा।

सेवा… इसके साथ संघर्ष जोड़ दिए जाएं तो पलामू का नाम चरितार्थ हो जाता है, जिसे “एक कदम मानवाता की ओर” के बहाने युवाओं ने युवापंथी दिखाई है.., औरों से कंबल छोड़ कलम बांटने का आह्वान किया है… जिसे युवा पलामू कहते हैं… जिनसे उम्मीद है, पलामू के नव निर्माण की…।।

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1 thought on “एक कदम मानवता की ओर

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