लेस्लीगंज अस्पताल में इलाज नहीं होने पर ग्रामीणों का हंगामा

पलामू

हर रोज पलामू की छोटी बड़ी घटनाओं को लेकर मैं आपके सामने होता हूँ, लेकिन कभी कभी ऐसी खबरें आती हैं जो मन को कुंठित करती हैं, जरा सोचिए एक गरीब आदमी जो दिन भर मेहनत कर सिर्फ इतना कमाता है कि अपने परिवार को दो वक्त की रोटी खिला सके, उसे अपने भविष्य की फिक्र नही होती वो बस अपने वर्तमान हालात में जी रहा होता है. और ऐसे में उसके परिवार में आती है बीमारी. अब बीमारी तो गरीब अमीर नही देखती, लेकिन बीमार का इलाज करने वाले लोग. गरीब अमीर को देखते हैं, अमीरों के लिए तो आलीशान, लग्जरियस हॉस्पिटल हैं, लेकिन गरीब आदमी, कहाँ जाएगा, क्या किसी बड़े अस्पताल में उसे जाने भी दिया जाएगा…?

शायद नही , उसके पास सिर्फ 1 विकल्प होता है सरकारी अस्पताल , जहाँ वो अपने गांव से मिलों दूरी तय कर इस आस के साथ जाता है की उसे मुक्कमल सुविधाएं ना सही कम से कम 2 गोलियां तो मिल ही जाएंगी.

जिससे थोड़ी भी राहत मिल जाये, लेकिन आज भी उनका इलाज होना सपना बनकर रह जाता है, आखिर क्यों????

एक सरकारी अस्पताल में तैनात चिकित्सक जो स्वयं खुली जुबां से राशि के गबन कर अव्यवस्था बनाए रखने का आरोप लगा रहा है. जिस सवाल पर हमेशा बवाल मचा रहता है और दूसरा कि सबको दोषी बताने वाले चिकित्सक को मरीज से ज्यादा अपने सुविधा की चिंता सता रही है. ऐसे में हम नैतिकता का वो सवाल तो पूछेंगे सिविल सर्जन महोदय से, कि क्या कारवाई ऐसी नहीं होनी चाहिए जो बाकीयों के लिए सबक हो.

वहीं परिजन हंगामा करते हैं तो दोषी.

कभी इन मरीजों के लिए भी डॉक्टर एशोसिएशन भी हड़ताल पर जाए तब ना. वैसे डॉ रवि ने सबके चेहरे उजागर कर दिए.

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