पलामू के शहीद को दी गयी अंतिम बिदाई

गढ़वा पलामू

देश भक्ति की आग में तपकर जो बना खरा सोना…
वो कुंदन अपने ही डिपार्टमेंट की नाकामी के भेट चढ़ गया…
जिसके कंधे पर जाने की थी ख्वाहिशें पिता की…
आज उसके ही कंधे पर भारती का परवाना चला गया…

जी कुंदन चला गया… पर जब उसके शहादत की खबर पहुंची पैतृक गांव कामगारपुर के गमहाबिग्हा तो हर ओर चित्कार से हर किसी का सीना फट पड़ा… मां की दुलार बबुआ, बबुआ के सित्कार में बदल गई तो बहन का प्यार भैया, भैया के चित्कार में तब्दील हो गया… और सन्नाटा पसरा गया 75 साल के बुढ़े बाप के सामने जो उसके नाम की शहनाई बजवाने की तैयारी में थे, पर उन्हें क्या मालूम था लाल आतंक से उबरे कामगारपुर समेत पलामू का कहर अब भी इस रूप में बाकी है कि फिर उनके घर से अर्थी निकलेगी और धून मातमी होगा…।

पर ये सब हुआ जब झारखंड सरकार की अधूरी अभियान ने एक जिंदादिल जवान को हम सब से छिन लिया, पलामू के लाल कुंदन सिंह के घर जब तिरंगे में लिपटा पार्थिव शव पहुंचा तो उमड़ पड़ा इलाका… हर दिल में था गम आंखे थी नम, बस हौंसला जीवन में आगे बढ़ने का… देश के नाम न्योछावर होते रहने का।

हुसैनाबाद की जमीं का एक लाल मिटकर भी अपना नाम अमर कर गया, नरेश सिंह का बेटा कुंदन सिंह नक्सलीयों से लोहा लेते लेते शहीद हो गया… जिसकी शहादत को याद रखने का साथ रहने का महकमा भरोसा देता है…।

बहरहाल राजकीय सम्मान के साथ कुंदन का अंतिम संस्कार पैतृक गांव गम्हाबिग्हा में किया गया… हजारों लोगों ने नम आंखो से विदा किया… पर कलम जब चली तो बयां कर दी…

तु कुंदन तू तपता सोना, सबकी आंखों में भर आया…
कभी ना बिछड़े अपना लल्ला कहती है धधकती काया…।।

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