‘हे राम’ कह ली थी अंतिम सांस

पलामू

पलामू समहरणालय में श्रद्धांजलि सभा

70 वीं पुण्यतिथि पर याद आए बापू

पलामू : दौ सौ साल की गुलामी से मुक्ति दिलाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को सात दशक पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई। आज उनकी 70 वीं पुण्यतिथि को पूरा देश शहीद दिवस के रूप में मना रहा है। तीन गोली लगने के बाद ‘हे राम’ कह कर अंतिम सांस लेने वाले बापू ने तो दुनिया को अलविदा कह दिया, पर सत्य एवं अहिंसा की ताकत का एहसास करा दिया… जता दिया कि सत्याग्रह की राह मुश्किल जरूर है पर सफलता के साथ संतुष्टि और सद्भावना का प्रतीक है।

पलामू में भी शहीद दिवस पर बापू को श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। पलामू समहरणालय में दो मिनट का मौन रखकर उनको याद कर उनके सिद्धांतों को जहाँ आत्मसात किया गया… वहीं मालायार्पण के साथ पुष्पांजलि अर्पित कर जिले के आला अधिकारियों ने आजादी देने वाले राष्ट्रपिता को नमन किया। गांधी एक विचार हैं… उनके सिद्धांतों को अपनाकर ही देश में सकल समाज की स्थापना की जा सकती है।

गांधी जी के पुण्यतिथि को शहीद दिवस के तौर पर मनाया जाता है। साबरमती के संत ने ही गुलामी की जंजीरों से जकड़े देश को एकसूत्र में पिरोने का काम किया था। एक धोती, एक चश्मा, और एक लाठी को धारण कर बापू ने देशवासीयों को संघर्ष में भी सत्य एवं अहिंसा के मार्ग पर चलने का ऐसा संदेश जारी किया जो आज भी प्रासंगिक है… जिसकी अपनी एक गांधीवादी जमात है।

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2 thoughts on “‘हे राम’ कह ली थी अंतिम सांस

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