छतरपुर नगर पंचायत का विकास रुका

पलामू

छतरपुर : छतरपुर नगर पंचायत का चुनाव होने के लगभग 9 माह बीत गए। बावजूद अब तक किसी तरह का विकास की शुरुआत नही हुई है। नगर पंचायत क्षेत्र में विकास के पहली कड़ी भी दूर-दूर तक नजर नहीं आती। छतरपुर प्रखंड के दस ग्रामीण गांव को नगर पंचायत का दर्जा बिना किसी के सलाह मशवरा के विधायक राधाकृष्ण किशोर ने दिलवाया था। राज्य सरकार ने छतरपुर, सडमा, मदनपुर, लोहराही, रामगढ़, बारा, खाटीन, करमा कला, मसिहानी को मिलाकर नगर पंचायत का दर्जा दिया था। उसके बाद से इन क्षेत्रों में विकास के गति मंद हो गई। सडमा, करमाकला, मदनपुर जैसे गांव जहां बहुतायत मनरेगा मजदूर थे और इनसे बिना किसी जानकारी के ही नगर पंचायत बना दिया गया था। यहां के ग्रामीण राजेंद्र उरांव बताते हैं कि पंचायत से कार्यो में जहां हम सभी को आसानी होती थी वहीं नगर पंचायत के दर्जे ने हमसे मनरेगा जैसे हमारा अधिकार भी छीन लिया। बताया कि चुनाव के इतने दिन बीतने के बाद कोई भी कार्य अब तक शुरू नही हुआ है। इधर नगर पंचायत में बजबजाती नालियां, गंदगी, बेरोजगारी छतरपुर की पहचान बन गई है। कई लोग कहते है कि छतरपुर को जानबूझ कर नगर पंचायत के इलाकों में पिछड़ेपन का हिस्सा बनाया जा रहा है। ताकि लोगो मे नगर पंचायत के प्रति आक्रोश हो। 

नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन जायसवाल ने बताया कि राज्य सरकार के द्वारा अभी तक दिशा निर्देश और राशि की आवंटन नही की गई है। जिससे विकास कार्यो को गति मिल सके। कहा कि बिना फंड के भी जो कार्य मानव सेवा से किये जा सकते है वह किया जा रहा है।

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