पेड़ के नीचे प्रसव

पलामू

पेड़ के नीचे प्रसव

कौन सुनेगा …किसको सुनाएं …

रामचंद्र के जिला अस्पताल का किस्सा…..

गेट पर डिलीवरी कराती सहिया….

साया था बस पेड़ की छाया……..

फिर रघुवर के राज में वह भी उनके इलाज मंत्री के घर में ,स्वास्थ्य सेवा की सच्चाई से पर्दा उठ गया, जब बेपर्दा सदर अस्पताल के गेट पर ही एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया। बस वजह थी, दूसरे मंजिल पर स्थित प्रसव विभाग तक पहुंचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं मिली । आधे घंटे तक सहीया अस्पताल में घूम-घूमकर स्ट्रेचर पर उठाकर ले जाने की विनती हर किसी से करती रही , पर जो विराजमान थे, वह यह कह कर चलते बने की यह मेरा काम नहीं है।

स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले पलामू के एकमात्र सदर अस्पताल में हद तो तब और हो गई , जब डिलीवरी हुए आधे घंटे भी नहीं बीता और महिला को पैदल चलाकर अस्पताल के बिस्तर तक ले जाना पड़ा ।

जबकि मेडिकल कॉलेज से लेकर हर सुविधा दुरुस्त करने का ढिंढोरा रामचंद्र चंद्रवंशी पलामू समेत पूरे राज्य में पीटते चलते हैं , और उनके जिले के अस्पताल में प्रसव के लिए तड़पती महिला को ले जाने के लिए किसी के पास फुर्सत नहीं है।
सदर प्रखंड के लहलहे से 22 किलोमीटर सहिया के सहारे तो सदर अस्पताल पहुंच गई , पर बेचैन महिला को स्ट्रेचर पर उठाकर ले जाने के लिए कोई नहीं पहुंचा । आखिरकार उसके डिलीवरी पेड़ के नीचे ही करा दी गई,
और कोई भी अस्पताल के डॉक्टर या नहीं पहुंची ।

संवेदनहीनता का आलम ये रहा कि डिलीवरी के बाद भी पैदल चलकर जच्चा को अस्पताल के अंदर जाना पड़ा। जहां फिर स्ट्रेचर पर उसे सुला दिया गया ,जो उसे एक घंटा पहले ही उपलब्ध हो जाना चाहिए था ।

प्रभारी सिविल सर्जन विजय सिंह सच जानने के बाद कार्रवाई की बात कर चलते बने ,पर इतना जरूर बता दिया की यह चूक आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की है । ठेकेदार बालाजी कंपनी है, “जी बालाजी कंपनी” और उनके लिए मरीज अस्पताल के गेट पर जिए या मरे किसी के पास फुर्सत कहां….

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