खुद की प्रतिभा को निखार लेफ्टिनेंट बने अनुराग

लातेहार

लातेहार : हमने एक शाम चिरागों से सजा रखी है, शर्त लोगों ने हवाओं से लगा रखी है, बात पूरानी है कि प्रतिभा देश, काल और परिस्थिति का मुहताज नहीं होती है, पर संघर्ष के बीच नक्सलग्रस्त इलाके में रहने वाले पलामू जिले के ¨सगराखुर्द निवासी जितेंद्र शुक्ला व उषा शुक्ला के पुत्र अनुराग शुक्ला ने अपनी प्रतिभा को ऐसा निखारा कि जिसने भी सुना हैरत में पड़ गया। गांव के अनुराग ने बतौर लेफ्टिनेंट गंगानगर राजस्थान में योगदान कर दिया। सात दिसंबर को पास आउट सेरेमनी के बाद साधारण परिवार के अनुराग की सफलता पर माता-पिता और अन्य लोगों का सहज यकीन करना मुश्किल हो रहा था, पर खामोशी के साथ किए गए संघर्ष से अनुराग को मिली सफलता ने शोर मचा दी और आज घर के लोगों का सारा सपना सच हो चुका है।

खुद प्रतिभा निखार कर पाई मंजिल :

अनुराग की सफलता यह साबित करने के लिए काफी है कि गांवों में भी प्रतिभा की कमी नहीं होती है, बस इसे निखारने की जरूरत होती है। पलामू जिले के ¨सगराखुर्द गांव के निवासी किसान सह संवेदक जितेंद्र शुक्ला के पुत्र अनुराग की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी विद्यालय में हुई। कहते हैं पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं, बचपन से ही पढ़ाई के प्रति निष्ठावान और प्रतिभावान अनुराग की सादगी भी आज के छात्रों के लिए प्रेरणाप्रद है। पिता ने कहा खून में ही पुलिस का जुनून :

अनुराग के पिता ने बताया कि हमारे खुन में ही पुलिस के प्रति जुनून है। अनु के दादा और नाना दोनों पुलिस में रहते हुए लंबे समय तक देशसेवा की है। अपने दादा स्व. फणेश्वर शुक्ला और नाना रामाकांत तिवारी की कृतियों की जानकारी लेकर उसने बचपन में ही देशसेवा में जाने का निश्चय कर लिया था।

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